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Manu

         "मनु"

"ज़िन्दगी जब बहती है ... तब पानी पर भी कदमो के निशाँ बनाती चलती है ... उम्र पर एक दौर ऐसा ज़रूर आता है जिसमे ज़हन हर लम्हा परवाज़ भरता है ....वक़्त  के  करवट  बदलने  पर  कहीं ये नदी की तरह गुज़र जाता है .........कहीं बर्फ की झील सा जम जाता है .........जहाँ ये झील है... वहाँ रिसता रहता है ....पिघलता रहता है ..... बहता है पूरी तरह और थमता है ...उन साँसों की तरह जो जाकर लौटती रहती हैं .................................ऐसे ही तुम्हारी ख़ामोशी में ...  एक झील बनकर मौजूद हूँ मैं" ..........."मनु"

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